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सफला एकादशी का व्रत अपने नामानुसार मनोनुकूल फल प्रदान करने वाला है. भगवान श्री कृष्ण इस व्रत की बड़ी महिमा बताते हैं. इस एकादशी के व्रत से व्यक्तित को जीवन में उत्तम फल की प्राप्ति होती है और वह जीवन का सुख भोगकर मृत्यु पश्चात विष्णु लोक को[...]

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मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि को महिलाएं अति उत्तम मानती हैं. यह तिथि गरी तपोव्रत के नाम से जानी जाती है. इस दिन महिलाएं अन्न जल का त्याग कर व्रत करती हैं. कुमारी कन्याएं योग्य वर पाने की इच्छा से यह व्रत रखती हैं और विवाहित स्त्रियां अपने पति औ[...]

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गीता के अनुसार अन्य सभी लोक में मर कर गया हुआ प्राणी पुन: गर्भ में आता है लेकिन जो विष्णु लोक (Vishnu lok) में जाता है वह जीवन चक्र के फेर से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। यूं तो पृथ्वी पर जितने भी प्रकार के जीव हैं वह सभी परमात्मा के ह[...]

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उत्पन्ना एकादशी विशेष पुण्यदायिनी है। इस एकादशी का व्रत मनुष्य को भोग और मोक्ष प्रदान करना वाला है। इस एकादशी व्रत से भगवान विष्णु और उनकी शक्ति दोनों ही प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को हर संकट और परेशानी से उबार देती हैं।

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्रीमद् भगवतद् पुराण के अनुसार श्री हरि विष्णु ही सृष्टि के आदि कर्ता हैं. इन्हीं की प्रेरणा से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की और शिव जी संहार कर रहे हैं. स्वयं भगवान विष्णु चराचर जगत का पालन कर रहे हैं. विष्णु की प्रसन्नता के लिए ही एकादशी[...]

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करवा चथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई माता का व्रत किया जाता है। यह व्रत पुत्र की लम्बी आयु और सुखमय जीवन की कामना से पुत्रवती महिलाएं करती हैं. कृर्तिक मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में यह व्रत रखा जाता है इसलिए इसे अहोई अ[...]

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प्राचीन काल में एक धर्मात्मा और दानी राजा थे. राजा का नाम मुचुकुन्द था. प्रजा उन्हें पिता के समान मानते और वे प्रजा को पुत्र के समान. राजा मुचुकुन्द वैष्ण्व थे और भगवान विष्णु के भक्त थे. वे प्रत्येक एकादशी का व्रत बड़ी ही निष्ठा और भक्ति स[...]

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नारी जब सप्तपदी यानी अग्नि के सात फेरे लेती है तो यही प्रार्थना करती है कि जब तक जीवन रहे मेरा सुहाग बना रहे. अपने सुहाग की रक्षा के लिए नारी यमराज से लड़ने के लिए तैयार रहती है और वह सब कुछ करती है जिससे उनका पति चिरायु हो.

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वह परम पिता चाहता है कि हम दुनियां की मोह माया से मुक्त हो कर आत्म को परमात्मा मे निरूपित कर दे. आत्मा का परमात्मा से मेल ही जीवात्मा का परम लक्ष्य है. इस लक्ष्य की दिया में हमें सांसारिक मोह, माया के चक्रव्यूह को तोड़कर मन, इन्द्रियो को का[...]

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