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प्रदोष व्रत (Pradosha vrata) कलियुग में अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला है। स्त्री अथवा पुरूष जो भी अपना कल्याण चाहते हों यह व्रत रख सकते हैं। प्रदोष व्रत (Pradosha vrata) को करने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है। सप्ताह के सातों [...]

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पुराणों के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पाप मोचिनी है (Chaitra kirshna paksha Ekadashi know as Papmochani Ekadashi) अर्थात पाप को नष्ट करने वाली. स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसे अर्जुन से कहा है.

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अधिक मास में कृष्ण पक्ष में जो एकादशी आती है वह हरिवल्लभा अथवा परमा एकदशी के नाम से जानी जाती है ऐसा श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा है (additional months krishna paksha Parma Ekadashi). भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की कथा व विधि भी बत[...]

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होली की पूर्व संध्या में होलिका दहन किया जाता है. इसके पीछे एक प्राचीन कथा है कि दीति के पुत्र हिरण्यकश्यपु भगवान विष्णु से घोर शत्रुता रखता था . इसने अपनी शक्ति के घमंड में आकर स्वयं को ईश्वर कहना शुरू कर दिया और घोषणा कर दी कि राज्य में क[...]

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जगत के कल्याण हेतु जो लीलाधारी भगवान अनेकानेक अवतार लेते हैं इन्हीं भगवान विष्णु के तृतीय अवतार वराह की पूजा माघ शुक्ल द्वादशी के दिन की जाती है जो वराह द्वादशी के नाम से जानी जाती है (Magha Shukla Dwadashi vrat). वराह भगवान का यह व्रत सुख,[...]

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्रकृति से मानव का सम्बन्ध आदि काल से है. मनुष्य सृष्टि के प्रारम्भ से ही प्रकृति की उपासना करता आ रहा है. वृक्ष में देवताओं का वास मानकर वृक्ष की उपासना भी की जाती रही है. पीपल और आंवले के वृक्ष को देवतुल्य मानकर उनकी आराधाना की जाती रही है[...]

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विजया एकादशी अपने नामानुसार विजय प्रादन करने वाली है। भयंकर शत्रुओं से जब आप घिरे हों और पराजय सामने खड़ी हो उस विकट स्थिति में विजया नामक एकादशी आपको विजय दिलाने की क्षमता रखती है। प्राचीन काल में कई राजे महाराजे इस व्रत के प्रभाव से अपनी [...]

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माघ शुक्ल सप्तमी का व्रत सूर्य देवता को समर्पित है. सूर्य को शास्त्रों एवं पुराण में आरोग्यदायक कहा गया है. सूर्य की उपासना से रोग मुक्ति का जिक्र कई स्थानों पर आया है. इस व्रत को करने वालों के रोग ठीक हो जाते हैं. त्वचा सम्बन्धी रोग होने प[...]

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देवी एकादशी भगवान जनार्दन की शक्ति हैं. इस देवी को वरदान प्राप्त हैं कि जो भी इनका व्रत रखेगा उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होगी और वह मोक्ष का भागी होगा. एकादशी का व्रत भगवान को अत्यंत प्रिय है. इससे पापी से पापी व्यक्ति का उद्धार हो जा[...]

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एकादशी व्रत (Ekadshi Vrat)  को शास्त्रों एवं पुराणों में काफी महत्व दिया गया है। यह व्रत जगपति जग्दीश्वर भगवान विष्णु और उनकी योगमाया को समर्पित है। जो व्यक्ति एकादशी का व्रत करते हैं उनका लकिक और पारलकिक जीवन संवर जाता है। यह व्रत रखने वाल[...]

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सूर्य भगवान आदि देव हैं अत: इन्हें आदित्य कहते हैं इसके अलावा अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लेने के कारण भी इन्हें इस नाम से जाना जाता है। सूर्य के कई नाम हैं जिनमें मार्तण्ड भी एक है जिनकी पूजा पष मास में शुक्ल सप्तमी को होती है। सूर्य दे[...]

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संकष्टहर चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा का विधान है. गणपति मंगलकारी और शुभ लाभ देने वाले हैं. इनकी पूजा से भक्तों के संकट और कष्ट समाप्त हो जाते हैं विशेषकर जो माघ कृष्ण पक्ष के दिन चन्द्रमा और मंगल सहित गणपति की पूजा एवं व्रत रखते हैं उनके[...]

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देवी रूक्मिणी का जन्म अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में हुआ था और श्री कृष्ण का जन्म भी कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को हुआ था व देवी राधा वह भी अष्टमी तिथि को अवतरित हुई थी. राधा जी के जन्म में और देवी रूक्मिणी के जन्म में एक अन्तर यह है कि देवी[...]

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