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भगवती दुर्गा के जिन न रूपों की हम पूजा करते चले आ रहे थे आज का दिन महादेवियों की विदाई का है. इस तिथि को देवी पृथ्वी लोक से अपने धाम को चली जाती हैं यही कारण है कि इस तिथि को यात्रा के नाम से भी जाता है. चुंकि मां दुर्गा अपने समस्त योगिनियो[...]

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शेरावाली दुर्गा मईया जगत के कल्याण हेतु न रूपों में प्रकट हुई और इन न रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री (Sidhhidatri) का. यह देवी प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण जगत की रिद्धि सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं.

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देवी दुर्गा के न रूपों में महागरी आठवीं हैं. दुर्गा सप्तशती (Durga Saptsati) में शुभ निशुम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्रार्थना देवतागण कर रहे थे वह महागरी हैं. देवी गरी के अंश से ही कशिकी का जन्म हुआ जिसने  शुम्भ निशुम्भ के[...]

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दुर्गा सप्तशती के प्रधानिक रहस्य में बताया गया है कि जब देवी ने इस सृष्टि का निर्माण शुरू किया और ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का प्रकटीकरण हुआ उसस पहले देवी ने अपने स्वरूप से तीन महादेवीयों को उत्पन्न किया. सर्वेश्वरी महालक्ष्मी ने ब्रह्माण्ड [...]

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मधु कैटभ नामक महापराक्रमी असुर से जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने इसी मंत्र से मां की स्तुति की थी. यह देवी कालरात्रि ही महामाया हैं और भग्वान विष्णु की योगनिद्रा हैं. इन्होंने ही सृष्टि को एक एक दूसर[...]

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भगवान स्कन्द की माता होने के कारण देवी स्कन्द माता के नाम से जानी जाती हैं. दुर्गा पूजा के पांचवे दिन देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय की माता की पूजा होती है. कुमार कार्तिकेय को ग्रंथों में सनतकुमार, स्कन्द कुमार के नाम से पुकारा गया है.[...]

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मां दुर्गा के नव रूपों में चथा रूप है कुष्मांडा देवी का (Durga Devi Chaturth Roop Devi Kushmanda). दुर्गा पूजा के चथे दिन हमें इसी देवी की उपासना करनी चाहिए.

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पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकै र्युता. प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता.. यह देवी चन्द्रघंटा का ध्यान मंत्र है. दुर्गा पूजा के तीसरे दिन आदिशक्ति दुर्गा के तीसरे रूप की पूजा होती है. मां का तीसरा रूप चन्द्रघंटा का है. देवी चन्द[...]

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आत्मा की अमरता के सिद्धान्त को तो स्वयं भगवान श्री कृष्ण गीता में उपदेशित करते हैं. आत्मा जब तक अपने परम+आत्मा से संयोग नहीं कर लेता तब तक विभिन्न योनियों में भटकता है और इस दरान उसे श्राद्ध कर्म से संतुष्टि मिलती है. श्राद्ध की बड़ी ही महि[...]

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देवी ब्रह्मचारिणी ( Devi Brahmachariani) का स्वरूप उनके नामनुसार ही तपस्विनी जैसा है. माता के इस रूप एवं उनकी भक्ति के मार्ग पर जब हम आगे बढ़ रहे हैं तो आइये मईया की महिमा का गुणगान करें.

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किसी भी रूप में देखा जाय तो यह हिन्दु समाज का एक महत्वपूर्ण त्यहार है जिसका धार्मिक, अध्यात्मिक, नैतिक व सांसारिक इन चारों ही दृष्टिकोण से काफी महत्व है. भक्त जन इस अवसर पर माता दुर्गा के न रूपों की पूजा करते हैं अत:इसे नवरात्रा के नाम भी ज[...]

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