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एकादशी व्रत (Ekadshi Vrat)  को शास्त्रों एवं पुराणों में काफी महत्व दिया गया है। यह व्रत जगपति जग्दीश्वर भगवान विष्णु और उनकी योगमाया को समर्पित है। जो व्यक्ति एकादशी का व्रत करते हैं उनका लकिक और पारलकिक जीवन संवर जाता है। यह व्रत रखने वाल[...]

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सूर्य भगवान आदि देव हैं अत: इन्हें आदित्य कहते हैं इसके अलावा अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लेने के कारण भी इन्हें इस नाम से जाना जाता है। सूर्य के कई नाम हैं जिनमें मार्तण्ड भी एक है जिनकी पूजा पष मास में शुक्ल सप्तमी को होती है। सूर्य दे[...]

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संकष्टहर चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा का विधान है. गणपति मंगलकारी और शुभ लाभ देने वाले हैं. इनकी पूजा से भक्तों के संकट और कष्ट समाप्त हो जाते हैं विशेषकर जो माघ कृष्ण पक्ष के दिन चन्द्रमा और मंगल सहित गणपति की पूजा एवं व्रत रखते हैं उनके[...]

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देवी रूक्मिणी का जन्म अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में हुआ था और श्री कृष्ण का जन्म भी कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को हुआ था व देवी राधा वह भी अष्टमी तिथि को अवतरित हुई थी. राधा जी के जन्म में और देवी रूक्मिणी के जन्म में एक अन्तर यह है कि देवी[...]

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सफला एकादशी का व्रत अपने नामानुसार मनोनुकूल फल प्रदान करने वाला है. भगवान श्री कृष्ण इस व्रत की बड़ी महिमा बताते हैं. इस एकादशी के व्रत से व्यक्तित को जीवन में उत्तम फल की प्राप्ति होती है और वह जीवन का सुख भोगकर मृत्यु पश्चात विष्णु लोक को[...]

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मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि को महिलाएं अति उत्तम मानती हैं. यह तिथि गरी तपोव्रत के नाम से जानी जाती है. इस दिन महिलाएं अन्न जल का त्याग कर व्रत करती हैं. कुमारी कन्याएं योग्य वर पाने की इच्छा से यह व्रत रखती हैं और विवाहित स्त्रियां अपने पति औ[...]

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गीता के अनुसार अन्य सभी लोक में मर कर गया हुआ प्राणी पुन: गर्भ में आता है लेकिन जो विष्णु लोक (Vishnu lok) में जाता है वह जीवन चक्र के फेर से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। यूं तो पृथ्वी पर जितने भी प्रकार के जीव हैं वह सभी परमात्मा के ह[...]

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उत्पन्ना एकादशी विशेष पुण्यदायिनी है। इस एकादशी का व्रत मनुष्य को भोग और मोक्ष प्रदान करना वाला है। इस एकादशी व्रत से भगवान विष्णु और उनकी शक्ति दोनों ही प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को हर संकट और परेशानी से उबार देती हैं।

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यह परम सत्य है कि जो प्राणी इस धरती पर जन्म लेता है उसकी मृत्यु होती है अत: इसे मृत्युलोक कहा गया है. मृत्युलोक में जब प्राण छूटता है तब जीव को अपने कर्मों के अनुरूप विभिन्न लोकों में स्थान मिलता है. इस क्रम में जीव को वैतरणी नदी पार करना ह[...]

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मार्गशीर्ष कृष्ष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को भगवान भोले नाथ भैरव रूप में प्रकट हुए थे. कालाष्टमी का व्रत इसी उपलक्ष्य में इस तिथि को किया जाता है. आदि देव महादेव ने यह रूप किस कारण से धारण किया इस सम्बन्ध में एक पारणिक कथा है। आइये यह क्था सुनें।[...]

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्रीमद् भगवतद् पुराण के अनुसार श्री हरि विष्णु ही सृष्टि के आदि कर्ता हैं. इन्हीं की प्रेरणा से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की और शिव जी संहार कर रहे हैं. स्वयं भगवान विष्णु चराचर जगत का पालन कर रहे हैं. विष्णु की प्रसन्नता के लिए ही एकादशी[...]

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कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा(KartikTripuri Poornima) के नाम से भी जाना जाता है. इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किय[...]

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भारत को देव की भूमि कहा गया है. भारतीय दर्शन और अध्यात्म विश्व के लिए रहस्यात्मक विषय रहा है. यहां के मनुष्यों का सीधा सम्बन्ध देवताओं से रहा है. हमारे प्राचीन ऋषि मुनियो को पता था कि जब कलियुग का आगमन होगा तो धर्म का लोप होने लगेगा ऐसे में[...]

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