December 17, 2008
ॐ जय शिव औंकारा, स्वामी हर शिव औंकारा ।ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा ॥जय शिव औंकारा ॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजेस्वामी पंचानन राजे ।हंसासन गरुड़ासन वृष वाहन साजे ॥जय शिव औंकारा ॥ दो भुज चारु चतुर्भुज दस भुज से सोहे स्वामी दस भुज से सोहे ।तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥जय शिव औंकारा [...]
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December 17, 2008
आरती कुँज बिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में वैजन्ती माला, बजावे मुरली मधुर बाला, श्रवण में कुण्डल झलकाला, नन्द के नन्द, श्री आनन्द कन्द, मोहन ब„⣞ज चन्दराधिका रमण बिहारी कीश्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गगन सम अंग कान्ति काली, राधिका चमक रही आली, लसन में ठाड़े वनमाली, भ्रमर सी [...]
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