सत्यनारायण व्रत एवं पूजा विधि और कथा (The story of Satyanaran Vrat and pooja procedure)

by Acharya Shashikant on November 6, 2008 · 6 comments

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भगवान सत्यनारायण विष्णु के ही रूप हैं (God Satyanarayan is an incarnation of God Vishnu)। कथा के अनुसार इन्द्र का दर्प भंग करने के लिए विष्णु जी ने नर और नारायण के रूप में बद्रीनाथ में तपस्या किया था वही नारायण सत्य को धारण करते हैं अत: सत्य नारायण कहे जाते हैं। इनकी पूजा में केले के पत्ते व फल के अलावा पंचामृत, पंच गव्य, सुपारी, पान, तिल, ज, मोली, रोली, कुमकुम, दूर्वा की आवश्यक्ता होती जिनसे भगवान की पूजा होती है। सत्यनारायण की पूजा के लिए दूध, मधु, केला, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है जो भगवान को काफी पसंद है। इन्हें प्रसाद के तर पर फल, मिष्टान के अलावा आटे को भून कर उसमें चीनी मिलाकर एक प्रसाद बनता वह भी भोग लगता है। आप जब सत्यनारण की कथा करवायें तो इन सामग्रियों की व्यवस्था कर लें।

भगवान की पूजा के विषय में

स्कन्द पुराण के रेवाखंड

में विस्तार पूर्वक बताया गया है (Satyanarayan Pooja and its story is written in detail in Reva khand this is a part of Skand Purana)। भगवान श्री सत्यनारयण की पूजन विधि से पूर्व आइये हम स्कन्द पुराण के रेखाखंड से भगवान श्री सत्यनारायण की अमृतमयी कथा का श्रवण करें।

श्री सत्यनारारण कथा (Story of Satyanarayan Vrat):

श्री सत्यनारायण की कई कथाएं है जिसमें से आपको द्वितीय अध्याय में जो कथा है वह सुना रहा हूं। इस कथा को सूत जी ने सनकादि ऋषियों के कहने पर कहा था। इनसे पूर्व नारद मुनि को स्वयं भगवान विष्णु ने यह कथा सुनाई थी। कथा के अनुसार एक ग़रीब ब्राह्मण था। ब्राह्मण भिक्षा के लिए दिन भर भटकता रहता था। भगवान विष्णु को उस ब्राह्मण की दीनता पर दया आई और एक दिन भगवान स्वयं ब्राह्मण वेष धारण कर उस विप्र के पास पहुंचे। विप्र से उन्होंने उनकी परेशानी सुनी और उन्हें सत्यनारायण पूजा की विधि बताकर भली प्रकार पूजन करने की सलाह दी।

ब्राह्मण ने श्रद्धा पूर्वक सत्यनिष्ठ होकर सत्यनारायण की पूजा एवं कथा की। इसके प्रभाव से उसकी दरिद्रता समाप्त हो गयी और वह धन धान्य से सम्पन्न हो गया। इस अध्याय में एक लकड़हाड़े की भी कथा है जिसने विप्र को सत्यनारायण की कथा करते देखा तो उनसे पूजन विधि जानकर भगवान की पूजा की जिससे वह धनवान बन गया। ये लोग सत्यनारायण की पूजा से मृत्यु पश्चात उत्तम लोक गये और कालान्तर में विष्णु की सेवा में रहकर मोक्ष के भागी बने।

श्री सत्यनारायण पूजन विधि (Procedure of Satyanarayan Pooja):

जो व्यक्ति सत्यनारायण की पूजा का संकल्प लेते हैं उन्हें दिन भर व्रत रखना चाहिए। पूजन स्थल को गाय के गोबर से पवित्र करके वहां एक अल्पना बनाएं और उस पर पूजा की चकी रखें। इस चकी के चारों पाये के पास केले का वृक्ष लगाएं। इस चकी पर ठाकुर जी और श्री सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा करते समय सबसे पहले गणपति की पूजा करें फिर इन्द्रादि दशदिक्पाल की और क्रमश: पंच लोकपाल, सीता सहित राम, लक्ष्मण की, राधा कृष्ण की। इनकी पूजा के पश्चात ठाकुर जी व सत्यनारायण की पूजा करें। इसके बाद लक्ष्मी माता की और अंत में महादेव और ब्रह्मा जी की पूजा करें।

पूजा के बाद सभी देवों की आरती करें और चरणामृत लेकर प्रसाद वितरण करें। पुरोहित जी को दक्षिणा एवं वस्त्र दे व भोजन कराएं। पुराहित जी के भोजन के पश्चात उनसे आशीर्वाद लेकर आप स्वयं भोजन करें।

नोट:

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{ 6 comments… read them below or add one }

kamal February 12, 2010 at 9:05 pm

satyanarayan katha is interesting but it is incomplete

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vilas August 21, 2011 at 3:03 pm

satanarayan puja

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dev February 25, 2012 at 7:33 pm

good story

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neetu October 15, 2014 at 9:49 am

satyanarayan katha is interesting but it is incomplete so mention for full story of katha

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AJAY KUMAR VAJPAYEE November 28, 2012 at 9:16 am

harsh ke saath sadhuwad.

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kalpesh kumath February 8, 2014 at 8:28 am

styanarayan bhagvan ki jai

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