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Makarsankranti Parv Tyohar (मकर संक्रान्ति पर्व त्यौहार)

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सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रान्ति का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन खिंचड़ी बनाकर लोग भगवान को भोल लगाते हैं और ब्राह्मणों को खिंचड़ी खिलाते हैं इसलिए मंकर संक्रान्ति को खिंचड़ी के नाम से भी जाना जाता है।

मकर संक्रान्ति पर्व (Makarsankranti Parv)
मकर संक्रति का त्यौहार भारत और उसके पड़ोसी देश नेपाल में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मानाया जाता है। भारत के विभिन्न प्रांतों में यह अलग अलग नाम और परम्परा के अनुसार मनाया जाता है। कहीं इसे मंकर संक्राति कहते हैं तो पंजाब हरियाणा में लोहरी (Punjab Hariyana Lohri, असम में बिहू (Assam Bihu) और तमिलनाडु में पोंगल (Tamilnadu Pongal) नाम से जाना जाता है। आइये हम भी इस त्यौहार का अंनन्द लें और इसके विषय में बात करें।

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करता है। भारत उत्तरी गोलार्द्ध का एक हिस्सा है अत: जब सूर्य इससे दूर हो जाता है तो रातें बड़ी हो जाती हैं और दिन छोटा हो जाता है। सूर्य के दक्षिणायन होने पर शास्त्रों के अनुसार यह समय मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं होता है क्योंकि इस समय देव लोक में रात्रि होती है। इस तथ्य का जिक्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में किया है।  श्री कृष्ण कहते है जो व्यक्ति उत्तरायण में शरीर का त्याग करता है वह मेरे लोक में निवास करता है, क्योंकि यह देवताओं का दिन होता है अत: जीवात्मा आवागमन से मुक्त हो जाता है। दक्षिणायन में शरीर त्याग करने वाले को पुन: देह धारण करना पड़ता है क्योकि इस समय देवताओं की रात्रि होती है। मकर संक्रान्ति का त्यौहार (Makar sankranti Tyohar) इसी उपलक्ष्य में मनाया जाता है कि सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है। इस तिथि को सूर्य धनु राशि से मकर (Sun Sagittarius) में प्रवेश करता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य मकर राशि (Sun Capricorn) में  अत्यंत शुभ संयोग माना जाता है। इस तिथि का एक अन्य रूप में भी महत्व बढ़ जाता है क्योंकि इस तिथि को खरमास समाप्त होता है और शुभ मास शुरू होता है।

इस तिथि को देव लोक का द्वार खुल जाता है अत: इस दिन मंदिर और अपने अपने घर पर लोग विशेष पूजा करते हैं। इस तिथि को प्रयाग (Prayag Snan और गंगासागर (Gangasagar Snan) में स्नान एवं दान का बड़ा महात्मय बताया गया है। शास्त्रों एवं पुराणों में कहा गया है कि मकर संक्रन्ति के दिन किया गया दान सौ गुणा पुण्यदायी होता है। इस दिन तिल गुड़ एवं उड़द की दाल दान करना बहुत ही पुण्यदायी होता है।

मकर संक्रान्ति मानने के विभिन्न तरीके (Makarsankranti utsav)

मकर संक्रान्ति के दिन तिल और गुड़ से बनी हुई चीजें खानें की परम्परा रही है। इस दिन तिल से बनी हुई वस्तुएं जैसे तिलकूट, तिल का लड्डू, गजक, रेवड़ी खाना पर्व का विधान है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई भागों में इस दिन अग्नि जलाकर महिलाएं उसके चारों ओर नाचती गाती हैं। इस अग्नि में तिल, मूंगफली, मक्का, गुड़ व चावल की आहुति दी जाती है और शीत ऋतु को विदाई दी जाती है। लोग एक दूसरे को रेवड़ी और तिल का लड्डू खिलाते हैं इस दिन अग्नि और सूर्य देवता से प्रार्थना की जाती है कि जैसे जैसे उत्तरायण में सूर्य के आने से दिन बड़ा होता है उसी प्रकार उनके पति की आयु लम्बी हो। इन प्रांतों में नई नवेली दुल्हन और नवजात शिशु के लिए विशेष आयोजन किया जाता है।

देश के कई भागों में इसे खिंचड़ी (Khichdi Parv) भी कहते हैं। इस समय तक धान खेतों से कट कर घर आ जाता है और नये चावल में उड़द की दाल और घी एवं अन्य पदार्थ मिलाकर खिंचड़ी बनाई जाती है। देवतों को खिंचड़ी का भोग लगाया जाता है और ब्रह्मणों को भी निमंत्रण देकर प्रसाद खिलाया जाता है।

तमिलनाडु में इस दिन पोंगल का त्यौहार (Pongal Festival)  मनाया जाता है। इस अवसर पर मिट्टी के बर्तन में गुड़ की खीर बनाई जाती है और सूर्य देवता को नैवैद्य के रूप में भोग लगाया जाता है। इस प्रसाद को बाद में परिवार सभी लोग मिलकर ग्रहण करते हैं।

कुछ खास बातें मकर संक्रान्ति की (Makarsankranti Special)
: इस दिन पितरों की मुक्ति के लिए तिल से श्राद्ध करना चाहिए। एक मान्यता यह भी है कि इस तिथि को ही स्वर्ग से गंगा की अमृत धारा धरती पर उतरी थी। शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं और इस तिथि को सूर्य मकर में प्रवेश करते हैं अत: यह भी कहा जाता है कि सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर जाते हैं इस खुशी में भी यह पर्व मनाया जाता है।

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