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Maghi Poornima Ganga Snan (माघी पूर्णिमा गंगा स्नान)

माघ शुक्ल पूर्णिमा स्नान महत्व (Magha Shukla Purnima Snan):
माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा जिसे लोक भाषा में माघी पूर्णिमा भी कहते हैं बहुत ही पुण्यदायिनी कही गयी है (Magha Shukla Paksha Poornima Maghi Poornima). मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व जल में भगवान का तेज मौजूद रहता है, देवताओं का यह तेज पाप का शमन करने वाला होता है. इस दिन सूर्योदय से पूर्व जब आकाश में पवित्र तारों का समूह मौजूद हो उस समय नदी में स्नान करने से घोर पाप भी धुल जाते हैं.

माघी पूर्णिमा स्नान समय विधि (Magha Purnima snan samay vidhi):
माघी पूर्णिमा के विषय में यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति तारों के छुपने के बाद स्नान करते हैं उन्हें मध्यम फल की प्राप्ति होती है तथा जो सूर्योदय के पश्चात स्नान करते हैं वह माघ स्नान के उत्तम फल से वंचित रह जाते हैं अत: इस तिथि को शास्त्रानुकूल आचरण का पालन करते हुए तारों के छुपने से पहले स्नान कर लेना उत्तम रहता है.

माघी पूर्णिमा (Magha Poornima) को कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Poornima) के समान महत्व प्राप्त है. इस दिन प्रयाग में स्नान करने से लाख गुणा फल की प्राप्ति होती है क्योंकि यहां गंगा और यमुना का संगम होता है. गंगा नदी में स्नान करने से हजार गुणा फल की प्राप्ति होती है. अन्य नदी और तालाब में स्नान करने से सौ गुणा फल की प्राप्ति होती है. इस पुण्य दिवस पर अगर आप प्रयाग में स्नान नहीं कर पाते हैं तो जहां भी स्नान करें वहां पुण्यदायिनी प्रयाग का मन ही मन ध्यान करके स्नान करना चाहिए.

माघी पूर्णिमा दान का महत्व (Magha Poornima Donation):
शास्त्रों के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन अन्न दान और वस्त्रदान का बड़ा ही महत्व है. इस तिथि को गंगा स्नान (Ganga Snan) के पश्चात भगवान विष्णु की पूजा करें. श्री हरि की पूजा के पश्चात यथा संभव अन्नदान करें अथवा भूखों को भरपेट भोजन कराएं. ब्रह्मणों एवं पुरोहितों को यथा संभव श्रद्धा पूर्वक दान दें और उनका आशीर्वाद लें, इसके बाद आप स्वयं भोजन करें.

शैव मत को मानने वाले व्यक्ति भगवान शंकर की पूजा कर सकते हैं. जो भक्त शिव और विष्णु के प्रति समदर्शी होते हैं वे शिव और विष्णु दोनों की ही पूजा करते हैं. समदर्शी भक्तों के प्रति भगवान शंकर और विष्णु दोनों ही प्रेम रखते हैं अत: गंगा के जल से शिव और विष्णु की पूजा करना परम कल्याणकारी माना गया है.


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Himanshu on 16 November, 2009 12:56:01
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आप सभी सम्मानित सज्जनों को मेरा प्रणाम | आशा है आप कुशल होंगे | बहुत लम्बे समय से मन मैं एक विचार को दबाये हुए था | जाने कैसे आज अंतरात्मा ने जोर देकर कहा की अगर कर नहीं सकते हो तो कह तो सकते हो | अगर तुम्हारे विचार मैं सच्चाई होगी तो कोई न कोई तुम्हारा साथ जरूर देगा |
मैं ग्राम पन्तगाँव जिला अल्मोड़ा का निवासी हूँ | स्वाभाव से सरल एवं व्यवसाय से इंजिनियर हूँ | अभी-अभी इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की है | दुनिया बहुत तो नहीं देखी है परन्तु थोडा बहुत अनुभव हो गया है | आज मैं जो भी हूँ जैसा भी हूँ उसमे मेरे माता पिता, पड़ोस, गाँव व क्षेत्र के सभी लोगों का सहयोग रहा है | स्कूल के लिए जिस रास्ते पर चला उसे कभी मैंने नहीं बनाया | जिन पेडो के फल खाए वो मैंने नहीं लगाये थे | जिस गाय या भेंस का दूध पिया उन्हें कभी पाला भी नहीं | जिस पेड़ की लकडियों की आंच से मैंने अपने पेट की भूख को मिटाया होगा कभी उन्हें सींचा तक नहीं | अब जब मैं इस योग्य हो गया हूँ की उन सभी का कर्ज अदा कर सकूँ तो मुझे गाँव छोड़ना पड़ा | क्योंकि गाँव रहकर कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोई कम नहीं हो सकता या यह कहा जा सकता है वहां पर उतनी दक्षता से कार्य नहीं हो सकता |
मेरे गाँव के लोग बहुत सीधे हैं | उनकी कोई अपेक्षा भी नहीं है | पर वो इतने समृद्ध नहीं हैं कि अपनी छोटी छोटी इच्छाओं को पूरी कर पायें | या तो तन या साथ या धन कि कमी सदैव उनके इच्छाओं मैं बाधा पहुंचाती है | एक इच्छा जिसे मैं पूरी करना चाहता हूँ , वो है गंगा स्नान | मेरे गाँव के वृद्ध, असहाय, गरीब लोग जब कभी भी किसी ईश्वरीय कार्य को पूर्ण करके आते हैं तो उनके अन्दर का खालीपन मुझे अन्दर तक झकझोर देता है | उन्होंने सुना है कि गंगा स्नान से पाप धुल जाते हैं, कई के पूर्वजों का कल्याण हो जाता है | परन्तु वो जाएँ भी तो कैसे ?

जाने कितने सालों से मैं ये सोचता आया हूँ कि उन सभी अक्षम लोगो को गंगा स्नान कराऊंगा | पर इस बार के कुम्भ ने मुझे बहुत बल दिया है | क्योंकि यह मौका अब १२ साल बाद ही आएगा और मैं इसे चूकना नहीं चाहता | मेरे पास इस कार्य के लिए केवल धन की कमी है | जो आप सभी की सहायता से पूरी हो जाएगी |

महोदय यदि इस शुभ कार्य मैं आप मेरी किसी भी तरह की मदद कर सकते हैं तो मैं आपका आभारी रहूँगा | मैं केवल धन की सहायता नहीं मांग रहा हूँ | आप मुझे किसी ऐसी संस्था का नाम /पता बता दीजियेगा जो इस कार्य मैं मरी मदद कर सकती है | या कोई ऐसा सुझाव जो इस यात्रा को पूर्ण करने मैं मदद कर सके | मैं गंगा को अपने घर गाँव ले जाने मैं सक्षम तो नहीं हूँ पर गाँव के लोगों को गंगा तक ला सकता हूँ |

वर्त्तमान में मैं कुल १००८ लोगों को कुम्भ स्नान करवाना चाहता हूँ, जिसमें ३०० महिलाएं व २०० पुरुष जो शारीरिक रूप से अक्षम हों (बहुत वृद्ध, अपंग) | २०० महिलाएं व २०० पुरुष जो शारीरिक रूप से सक्षम हों पर आर्थिक रूप से कमजोर हैं | १०८(पुरुष या स्त्री ) वो लोग जो शारीरिक रूप से पूर्ण समर्थ हों (जिनके पास या तो साथ या धन की कमी हो और गंगा स्नान की इच्छा रखते हों ) और इस कार्य मैं अपनी सेवा देना चाहते हों |

यदि आप इस यात्रा मैं किसी भी प्रकार से सहयोग देना चाह रहे हैं तो कृपया मुझे itspant [at] gmail.com. पर संपर्क कीजियेगा | खर्चे का पूर्ण विवरण आपको भेज दिया जायेगा |

आपके अनमोल समय के लिए आपका बहुत बहुत धन्यबाद

हिमांशु कुमार पन्त
ग्राम पन्तगाँव पोस्ट ऑफिस पन्तगाँव
वाया चौनालिया जिला अल्मोड़ा
उत्तराखंड (भारत)
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