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व्रत एवं त्यौहार

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शत अपराध शमन व्रत (Shat Apradh Shamn Vrata)

हम मनुष्य कर्मों से बंधे हुए हैं। अपने कर्म के अनुसार हमें उसका फल भी भोगना होता है। अच्छे कर्म का अच्छा फल मिलता है और अपराध के लिए दंड भी मिलता है। हमसे जाने अनजाने अपराध भी हो जाता। ईश्वर अपनी संतान का अपराध क्षमा करने देता है जब उसकी संतान अपराध मुक्ति के लिए प्रार्थना करता है एवं अपराध शमन के लिए व्रत करता है।
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प्रदोष व्रत का महत्व (Pradosha vrata and Vidhi)

प्रदोष व्रत (Pradosha vrata) कलियुग में अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला है। स्त्री अथवा पुरूष जो भी अपना कल्याण चाहते हों यह व्रत रख सकते हैं। ...
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Varuthini Ekadashi Vrat - वरूथिनी एकादशी व्रत एवं महात्म्य

वर्ष के बारह महीनों में हर महीने दो एकादशी आती है, एक कृष्ण पक्ष की और एक शुक्ल पक्ष की। वैसाख कृष्ण पक्ष में जो एकादशी आती है उसे वरूथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यहां हम इसी एकादशी व्रत के वारे में बतायेंगे....
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Bhishma Panchak Vrat Katha - भीष्म पंचक व्रत कथा विधि

कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि को शास्त्रों में बहुत ही उत्तम तिथि कहा गया है. इस तिथि को तुलसी विवाह और देवउत्थान एकादशी का व्रत किया जाता है. इस तिथि से ही भीष्म पंचक व्रत आरम्भ होता है. भीष्म पंचक व्रत पांच दिनों तक चलने वाला व्रत है. ...
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कामदा एकादशी व्रत (Kamda Ekadshi Vrat)

चैत्र शुक्ल एकादशी से प्रारम्भ होकर चैत्र कृष्ण् तक कुल 24 एकादशी होती है। पुरूषोत्तम मास की दो एकादशी को जोड़कर वर्ष में कुल 26 एकदशी होती है। यहां हम चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी महात्म्य का रसपान करेंगे। ...
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वामन जयन्ती व्रतोपवास (Vaman Jayanti Vrat)

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन वामन जयन्ती (Baman Jayanti) मनाई जाती है। मान्यता यह है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन के रूप में अवतार (Baman Avtar) लिया था।...
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पद्मिनी एकादशी व्रत कथा महात्मय (Padmini Ekadashi Vrat Katha)

मल मास जिसे अधिक मास या पुरूषोत्तम मास कहा गया है। इस मास में दो एकादशी आती है जिसमें अत्यंत पुण्य दायिनी पद्मिनी एकादशी भी एक है। इस एकादशी का क्या महात्मय एवं व्रत विधान है आइये यह देखें। ...
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सत्यनारायण व्रत एवं पूजा विधि और कथा (The story of Satyanaran Vrat and pooja procedure)

कलियुग मे जहां सत्य का सर्वथा लोप होता जा रहा है वहां, भगवान सत्यनारण ही हैं जो मनुष्य को पाप से मुक्ति प्रदान कर सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा और बल देते हैं जिससे मनुष्य पाप कर्म से विरत होकर श्री हरि के चरणों का सेवन करने की योग्यता प्राप्त कर स्वर्ग में अपने लिए स्थान बना पाता है। इसलिए कहा गया है कि कलिकाल में श्री सत्यनारण की पूजा अति मंगलकारी और पापहारी है। ...
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Aasamai vrat katha (आसमाई व्रत कथा)

प्राचीन काल से महिलाएं अपनी आशाओं की पूर्ति के लिए आसमाई की पूजा और व्रत करती चली आ रही हैं। आसमाई में आस्था और विश्वास का आधार क्या है और इस व्रत का क्या विधान है आइये इसका अवलोकन करें। ...
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शनिवार के दिन शनि व्रत (Shanidev Vrat)

शनिदेव की कथा के अनुसार शनिदेव की शक्ति और पराक्रम को देखकर भगवान शंकर ने उन्हें अपना शिष्य बनाया और उन्हें दंडाधिकारी का पद प्रदान किया। शनिदेव के हाथों में दंड का होना इसी घटना का प्रतीक चिन्ह है। शनि महाराज प्राfणयों को उसके कर्म के अनुसार फल देते हैं जिससे प्राणियों को कष्ट महसूस होता है और उन्हें क्रूर देव की संज्ञा दी जाती हैं...
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