Bhishma Panchak Vrat Katha – भीष्म पंचक व्रत कथा विधि

by Acharya Shashikant on December 25, 2008 · 2 comments

in Festivals


द्वापर में जब श्री कृष्ण का जन्म हुआ तब उन्होंने मनुष्य को पाप कर्म के प्रभाव से मुक्ति दिलाने के लिए और उत्तम गति प्राप्त करने के लिए कई व्रत और विधि विधान को निर्माण किया. वे व्रत और विधियां कलियुग के इस समय में मुनुष्य के लिए अति कल्याणकारी हैं. जो मनुष्य पाप से मुक्ति की कामना रखते हैं और उत्तम गति प्राप्त करना चाहते हैं वे कृष्ण द्वारा स्थापित व्रत भीष्म पंचक का लाभ उठा सकते हैं.

भीष्म पंचक व्रत कथा (Bhishma Panchak Vrat Katha)

महाभारत युद्ध के बाद जब पांण्डवों की जीत हो गयी तब श्री कृष्ण भगवान पांण्डवों को भीष्म पितामह के पास ले गये और उनसे अनुरोध किया कि आप पांण्डवों को अमृत स्वरूप ज्ञान प्रदान करें. भीष्म भी उन दिनों शर सैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतिक्षा कर रहे थे. कृष्ण के अनुरोध पर परम वीर और परम ज्ञानी भीष्म ने कृष्ण सहित पाण्डवों को  राज धर्म, वर्ण धर्म एवं मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया. भीष्म द्वारा ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा तिथि यानी पांच दिनों तक चलता रहा. भीष्म ने जब पूरा ज्ञान दे दिया तब श्री कृष्ण ने कहा कि आपने जो पांच दिनों में ज्ञान दिया है यह पांच दिन आज से अति मंगलकारी हो गया है. इन पांच दिनों को भविष्य में भीष्म पंचक व्रत के नाम से जाना जाएगा. यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी होगा, जो श्रद्धापूर्वक इस व्रत को रखेंगे उन्हें मृत्य पश्चात उत्तम गति प्राप्त होगी. यह व्रत पूर्व संचित पाप कर्मों से मुक्ति प्रदान करने वाली और कल्याणकारी होगी. इस प्रकार भीष्म पंचम व्रत की शुरूआत भगवान श्री कृष्ण ने की.

भीष्म पंचक व्रत पूजा विधि (Bhishma Panchak Vrat Pooja Vidhi)

भीष्म पंचम व्रत में चार द्वारा वाला एक मण्डप बनाया जाता है. मंडप को गाय को गोबर से लीप कर मध्य में एक वेदी का निर्माण किया जाता है. वेदी पर तिल रखकर कलश स्थापित किया जाता है. इसके बाद भगवान वासुदेव की पूजा की जाती है. इस व्रत में एकादशी से लेकर पूर्णिमा तिथि तक घी के दीपक जलाए जाते हैं. भीष्म पंचक व्रत करने वाले को पांच दिनों तक संयम एवं सात्विकता का पालन करते हुए यज्ञादि कर्म करना चाहिए. इस व्रत में गंगा पुत्र भीष्म की तृप्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण का भी विधान है.

{ 2 comments… read them below or add one }

Charusmita Gulliya November 19, 2013 at 10:17 am

thank u 4 dis.

Reply

kamal singh tanwar September 25, 2014 at 9:51 am

jai dada bhisham pitamah ki

Reply

Cancel reply

Leave a Comment

Previous post:

Next post: