शनिवार के दिन शनि व्रत (Shanidev Vrat)
शनिदेव की कथा के अनुसार शनिदेव की शक्ति और पराक्रम को देखकर भगवान शंकर ने उन्हें अपना शिष्य बनाया और उन्हें दंडाधिकारी का पद प्रदान किया। शनिदेव के हाथों में दंड का होना इसी घटना का प्रतीक चिन्ह है। शनि महाराज प्राfणयों को उसके कर्म के अनुसार फल देते हैं जिससे प्राणियों को कष्ट महसूस होता है और उन्हें क्रूर देव की संज्ञा दी जाती हैं
शनि पक्षरहित होकर अगर पाप कर्म की सजा देते हैं तो उत्तम कर्म करने वाले मनुष्य को हर प्रकार की सुख सुविधा एवं वैभव भी प्रदान करते हैं। शनि देव की जो भक्ति पूर्वक व्रतोपासना करते हैं वह पाप की ओर जाने से बच जाते हैं जिससे शनि की दशा आने पर उन्हें कष्ट नहीं भोगना पड़ता।
शनिवार व्रत की विधि (Shanidev Vrat Vidhi)
शनिवार का व्रत यूं तो आप वर्ष के किसी भी शनिवार के दिन शुरू कर सकते हैं परंतु श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारम्भ करना अति मंगलकारी है । इस व्रत का पालन करने वाले को शनिवार के दिन प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके शनिदेव की प्रतिमा की विधि सहित पूजन करनी चाहिए। शनि भक्तों को इस दिन शनि मंदिर में जाकर शनि देव को नीले लाजवन्ती का फूल, तिल, तेल, गुड़ अर्पण करना चाहिए। शनि देव के नाम से दीपोत्सर्ग करना चाहिए।
शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा के पश्चात उनसे अपने अपराधों एवं जाने अनजाने जो भी आपसे पाप कर्म हुआ हो उसके लिए क्षमा याचना करनी चाहिए। शनि महाराज की पूजा के पश्चात राहु और केतु की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन शनि भक्तों को पीपल में जल देना चाहिए और पीपल में सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए। शनिवार के दिन भक्तों को शनि महाराज के नाम से व्रत रखना चाहिए।
शनिश्वर के भक्तों को संध्या काल में शनि मंदिर में जाकर दीप भेंट करना चाहिए और उड़द दाल में खिचड़ी बनाकर शनि महाराज को भोग लगाना चाहिए। शनि देव का आशीर्वाद लेने के पश्चात आपको प्रसाद स्वरूप खिचड़ी खाना चाहिए। सूर्यपुत्र शनिदेव की प्रसन्नता हेतु इस दिन काले चींटियों को गुड़ एवं आटा देना चाहिए। इस दिन काले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए। अगर आपके पास समय की उपलब्धता हो तो शनिवार के दिन 108 तुलसी के पत्तों पर श्री राम चन्द्र जी का नाम लिखकर, पत्तों को सूत्र में पिड़ोएं और माला बनाकर श्री हरि विष्णु के गले में डालें। जिन पर शनि का कोप चल रहा हो वह भी इस मालार्पण के प्रभाव से कोप से मुक्त हो सकते हैं। इस प्रकार भक्ति एवं श्रद्धापूर्वक शनिवार के दिन शनिदेव का व्रत एवं पूजन करने से शनि का कोप शांत होता है और शनि की दशा के समय उनके भक्तों को कष्ट की अनुभूति नहीं होती है।
- शत अपराध शमन व्रत (Shat Apradh Shamn Vrata)
- प्रदोष व्रत का महत्व (Pradosha vrata and Vidhi)
- Varuthini Ekadashi Vrat - वरूथिनी एकादशी व्रत एवं महात्म्य
- Bhishma Panchak Vrat Katha - भीष्म पंचक व्रत कथा विधि
- Navgrah Shanti Durga Pooja - नवग्रह शांति दुर्गा पूजा के नौ दिनों में
- शनिवार के दिन शनि व्रत (Shanidev Vrat)
- कामदा एकादशी व्रत (Kamda Ekadshi Vrat)
- वामन जयन्ती व्रतोपवास (Vaman Jayanti Vrat)
- Arti Santoshi Ma - सन्तोषी माता की आरती
- Ganesh jI ki Arti - गणेश जी की आरती
- Arti Amba Gauri - अम्बे गौरी की आरती
- Ramayan ji ki Arti - आरती श्री रामायणजी की ।
- Arti Shiv Shankar - शिव शंकर जी की आरती
- Arti - Krishna Kunjvihari - आरती कुँज बिहारी की
- Hanuman Ji ki Arti - हनुमान जी की आरती


del.icio.us

I want to know about shnidev vrat,so would you mail me on my e mail id
I am doing shani vrat last one year. but i want to break this vrat for some time.
Please tell me how to take a break...and also how i can start doing it again.
I eat fruit and milk/water during the vrat.
so please help me
Jai Shanidev
Dhiraj
jai shanidev-jai shanidev-jaidhanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev- jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-
jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-
jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-jai shanidev-
this site is very intersiting
om sssss shanidev
jai kokiladham
Post your comment