Ramayan ji ki Arti – आरती श्री रामायणजी की ।

by Acharya Shashikant on December 17, 2008 · 1 comment

in Arti

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आरती श्री रामायणजी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥

गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद ।
बालमीक बिग्यान बिसारद ॥
सुक सनकादि सेष और सारद ।
बरन पवन्सुत कीरति नीकी ॥

गावत बेद पुरान अष्टदस ।
छओं सास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥
मुनि जन धन संतन को सरबस ।
सार अंस सम्म्मत सब ही की ॥

गावत संतत संभु भवानी ।
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी ।
कागभुसुंडि गरुड के ही की ॥

कलि मल हरनि बिषय रस फीकी ।
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ॥
दलन रोग भव भूरि अमी की ।
तात मात सब बिधि तुलसी की ॥

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