Ganesh jI ki Arti - गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी ।
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ॥
अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया ।
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥
अन्य पोस्टें
- शत अपराध शमन व्रत (Shat Apradh Shamn Vrata)
- प्रदोष व्रत का महत्व (Pradosha vrata and Vidhi)
- Varuthini Ekadashi Vrat - वरूथिनी एकादशी व्रत एवं महात्म्य
- Bhishma Panchak Vrat Katha - भीष्म पंचक व्रत कथा विधि
- Navgrah Shanti Durga Pooja - नवग्रह शांति दुर्गा पूजा के नौ दिनों में
- शनिवार के दिन शनि व्रत (Shanidev Vrat)
- कामदा एकादशी व्रत (Kamda Ekadshi Vrat)
- वामन जयन्ती व्रतोपवास (Vaman Jayanti Vrat)
- Arti Santoshi Ma - सन्तोषी माता की आरती
- Ganesh jI ki Arti - गणेश जी की आरती
- Arti Amba Gauri - अम्बे गौरी की आरती
- Ramayan ji ki Arti - आरती श्री रामायणजी की ।
- Arti Shiv Shankar - शिव शंकर जी की आरती
- Arti - Krishna Kunjvihari - आरती कुँज बिहारी की
- Hanuman Ji ki Arti - हनुमान जी की आरती
1
कुल
75
:
1 - 15


del.icio.us

Post your comment