प्रदोष व्रत का महत्व (Pradosha vrata and Vidhi)



प्रदोष व्रत (Pradosha vrata) कलियुग में अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला है। स्त्री अथवा पुरूष जो भी अपना कल्याण चाहते हों यह व्रत रख सकते हैं। प्रदोष व्रत  (Pradosha vrata) को करने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है। सप्ताह के सातों दिन के प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व है

  • Pradosha vrata on Sunday - रविवार के दिन प्रदोष व्रत आप रखते हैं तो सदा नीरोग रहेंगे
  • Pradosha vrata on Monday - सोमवार के दिन व्रत करने से आपकी इच्छा फलित होती है (Pradosha vrata on Monday)।
  • Pradosha vrata on Tuesday - मंगलवार को प्रदोष व्रत रखने से रोग से मुक्ति मिलती है और आप स्वस्थ रहते हैं।
  • Pradosha vrata on Wednesday - बुधवार के दिन इस व्रत का पालन करने से सभी प्रकार की कामना सिद्ध होती है।
  • Pradosha vrata on Thursday - बृहस्पतिवार के व्रत से शत्रु का नाश होता है।
  • Pradosha vrata on Friday - शुक्र प्रदोष व्रत से सभाग्य की वृद्धि होती है।
  • Pradosha vrata on Saturday - शनि प्रदोष व्रत से पुत्र की प्राप्ति होती है।

इस व्रत के महात्म्य को गंगा के तट पर किसी समय वेदों के ज्ञाता और भगवान के भक्त श्री सूत जी ने सनकादि ऋषियों को सुनाया था। सूत जी ने कहा है कि कलियुग में जब मनुष्य धर्म के आचरण से हटकर अधर्म की राह पर जा रहा होगा, हर तरफ अन्याय और अनचार का बोलबाला होगा। मानव अपने कर्तव्य से विमुख हो कर नीच कर्म में संलग्न होगा उस समय प्रदोष व्रत ऐसा व्रत होगा जो मानव को शिव की कृपा का पात्र बनाएगा और नीच गति से मुक्त होकर मनुष्य उत्तम लोक को प्राप्त होगा।

सूत जी ने सनकादि ऋषियों को यह भी कहा कि प्रदोष व्रत से पुण्य से कलियुग में मनुष्य के सभी प्रकार के कष्ट और पाप नष्ट हो जाएंगे। यह व्रत अति कल्याणकारी है, इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति होगी। इस व्रत में अलग अलग दिन के प्रदोष व्रत से क्या लाभ मिलता है यह भी सूत जी ने बताया। सूत जी ने सनकादि ऋषियों को बताया कि इस व्रत के महात्मय को सर्वप्रथम भगवान शंकर ने माता सती को सुनाया था। मुझे यही कथा और महात्मय महर्षि वेदव्यास जी ने सुनाया और यह उत्तम व्रत महात्म्य मैने आपको सुनाया है।


प्रदोष व्रत विधान (Pradosha Vrat Vidhi)


सूत जी ने कहा है प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी के व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं। सूर्यास्त के पश्चात रात्रि के आने से पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस व्रत में महादेव भोले शंकर की पूजा की जाती है। इस व्रत में व्रती को निर्जल रहकर व्रत रखना होता है। प्रात: काल स्नान करके भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप सहित पूजा करें। संध्या काल में पुन: स्नान करके इसी प्रकार से शिव जी की पूजा करना चाहिए। इस प्रकार प्रदोष व्रत करने से व्रती को पुण्य मिलता है।

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181 Comments

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  1. 11 March, 2016 07:52:49 PM ravi

    yeh bhai sahi bola yr kyuki bhagvaan na paide lete h vo na kch khate h visvaas to 75 %tut gya pr kisi ki bhakti ko hurt ni krna maine isliye kehta hu dmg se b soche ve log jo inna bhagvaan ko dete h

  2. 07 March, 2016 04:38:58 PM sunil maurya

    Baba kashi bishwanath ki jai Tirilochan Mahadew ki jai

  3. 07 March, 2016 07:46:57 AM meenakshi singh

    Sir aaj shivratri h or Maine pehle kabhi upwas nhi rkha tha aaj bhi ni rkhna chahati thi isliye khana khaliya pr bad m muze bura laga or socha pure saal m 1bar ye din aaega isliy muze upwas rkhna chahiye tha kya me sham me ku6 bhi na khau or ab upwas rkhu to kya rkh skti hu? Plz sir help me &give some advice.

  4. 07 March, 2016 07:16:32 AM sunil kumar

    Jruri Nhi Renu ji Navratro par lahsun, Pyaz agar khana chahte ho kha skte h bt hunuman ji vart vart par nhi khane chaiye. Sunil

  5. 06 March, 2016 07:39:25 AM Ragini

    Kya is vrat me din me kuch khana chahiye ya ni faladi

  6. 06 March, 2016 05:40:24 AM dharam veer yadav

    sir meri shadi ko 8 saal ho gaye hai par abhi tak koi umeed nahi about children kya mai aur meri wife dono ek saath vrat rakh sakte hain aur kya sham ko udyapan ke baad khana kha sakte hai

  7. 27 February, 2016 12:21:10 AM प्रविन अमझीरे

    आदरणीय, मुझे शत अपराध व्रत करना है, यह व्रत किस तिथि से, कैसे, कब से कब तक किया जाता है, इस व्रत के नियम, विधि विधान क्या है, व्रत के दौरान यानी व्रत पूर्ण होने तक ब्रम्हाब्रम्हानं का पालन कैकैसे किया जाता है

  8. 25 February, 2016 08:57:06 AM Pushpa

    sir, mein pradosh vrat karti hu...sirf mandir jati hu, koi puja nhi karti, subah aur din mein coffee aur upavas ka sabudana khichadi khati hu....kya ye pradosh vrat mein kar sakti hu

  9. 06 February, 2016 07:53:20 AM vasant yadav

    कुछ कुछ अनुभव आ रहा है|

  10. 05 February, 2016 07:18:18 AM vandana Mishra

    Kya malmas wale saal me prados vrat suru kar sakte hai

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