Bhai Duj Yam Dwitya Parv Tyohar (भाई दूज यम द्वितीया पर्व त्यहार)

भाई दूज भाई पूजन विधि (Bhai Duj Bhai Poojan Vidhi)

भाई दूजको एक अन्य नाम यम द्वितीया (Yam Dwitiya) से भी सम्बोधित किया जाता है. यम द्वितीया का त्यहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि (Bhai Duj Karti Shukla dwitya) को मानाया जाता है. इस त्यहार के प्रति भाई बहनों में काफी उत्सुकता रहती है और वे इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस दिन भाई बहन सुबह सवेरे स्नान करके नये वस्त्र धारण करते हैं. बहनें आसन पर चावल के घोल से चक बनाती हैं. इस चक पर भाई को बैठा कर बहनें उनके हाथों की पूजा करती हैं.

इस पूजा में भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल लगाती हैं उसके Šৠपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए कुछ मंत्र बोलती हैं जैसे "गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े"  इसी प्रकार कहीं इस मंत्र के साथ हथेली की पूजा की जाती है " सांप काटे, बाघ काटे, बिच्छू काटे जो काटे सो आज काटे" इस तरह के शब्द इसलिए कहे जाते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि आज के दिन अगर भयंकर पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे.

कहीं कहीं इस दिन बहनें भाई के सिर पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और फिर हथेली में कलावा बांधती हैं. भाई का मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन मिस्री खिलाती हैं. संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं. इस समय Šৠपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है. इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है या चील जाकर यमराज को बहनों का संदेश सुनाएगा.

यम द्वितीया कथा (Yam Dwitya Katha)

भारतीय में जितने भी पर्व त्यहार होते हैं वे कहीं न कहीं लोकमान्यताओं एवं कथाओं से जुड़ी होती हैं. इस त्यहार की भी एक पराणिक कथा है. कथा के अनुसार. यमी यमराज की बहन हैं जिनसे यमराज काफी प्रेम व स्नेह रखते हैं. कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को एक बार जब यमराज यमी के पास पहुंचे तो यमी ने अपने भाई यमराज की खूब सेवा सत्कार की. बहन के सत्कार से यमराज काफी प्रसन्न हुए और उनसे कहा कि बोलो बहन क्या वरदान चाहिए. भाई के ऐसा कहने पर यमी बोली की जो प्राणी यमुना नदी के जल में स्नान करे वह यमपुरी न जाए. यमी की मांग को सुनकर यमराज चिंतित हो गये. यमी भाई की मनोदशा को समझकर यमराज से बोली अगर आप इस वरदान को देने में सक्षम नहीं हैं तो यह वरदान दीजिए कि आज के दिन जो भाई बहन के घर भोजन करे और मथुरा के विश्राम घट पर यमुना के जल में स्नान करे उस व्यक्ति को यमलोक नहीं जाना पड़े.

इस पराणिक कथा के अनुसार आज भी परम्परागत तर पर भाई बहन के घर जाकर उनके हाथों से बनाया भोजन करते हैं ताकि उनकी आयु बढ़े और यमलोक नहीं जाना पड़े. भाई भी अपने प्रेम व स्नेह को प्रकट करते हुए बहन को आशीर्वाद देते है और उन्हें वस्त्र, आभूषण एवं अन्य उपहार देकर प्रसन्न करते हैं.

Tags

Categories


Latest Posts