Karvachauth Vrat katha Vidhi (करवाचथ व्रत क्था विधि)

करवा चथ महात्मय (Karvachauth Mahatmya)

नारी जब सप्तपदी यानी अग्नि के सात फेरे लेती है तो यही प्रार्थना करती है कि जब तक जीवन रहे मेरा सुहाग बना रहे. अपने सुहाग की रक्षा के लिए नारी यमराज से लड़ने के लिए तैयार रहती है और वह सब कुछ करती है जिससे उनका पति चिरायु हो.

भारतीय पराणिक कथाओं में इस प्रकार की अनेक कथाएं हैं जब पत्नी ने अपने पति के जीवन के लिए यमराज को भी ललकारा है और उनसे अपने पति का प्राण वापस प्राप्त कर लम्बे समय तक पति परायण रही हैं. वट सावित्री का व्रत हो या करवा चथ का व्रत दोनों ही व्रत का उद्देश्य पति की लम्बी आयु की कामना है (Vatsavitri Karvachauth vrat)

यहां हम कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किये जाने वाले व्रत करक चतुर्थी यानी करवा चथ (Karak Chaturthi Karvachauth) की मान्यता और पूजा के विषय में बात कर रहे हैं. करवा चथ की मान्यता यह है कि इस व्रत को करने से देवी करवा और वीरवती ने जिस तरह अपने पति के प्राणों को बचाकर अपने सुहाग की रक्षा की उसी प्रकार उनका सुहाग भी बना रहेगा.

यह सुहागिन स्त्रियों का व्रत है. इस व्रत को वह स्त्रियां भी चाहें तो कर सकती हैं जिनकी मंगनी हो चुकी हो और शादी होने वाली हो. व्रत का नियम यह है कि सुबह स्नान ध्यान करके संकल्प करें कि आप अपने पति की लम्बी आयु, उनके स्वास्थ्य व मंगल हेतु कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (Kartik Krishna Paksha Chaturthi) के दिन निर्जल व्रत रखेंगी और चन्द्रमा के दर्शन के पश्चात ही जल ग्रहण करेंगी." इस संकल्प के बाद आपको चन्द्रमा के दर्शन से पहले तक निर्जल रहना होता है.

करवा चथ कथा कथा (Karvachauth Vrat Katha):

प्राचीन काल की बात है करवा नाम की एक स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे गाँव में रहती थी. एक दिन की बात है करवा के पति अन्य दिनों की तरह नदी में स्नान करने गये. स्नान करते समय वहां एक मगर ने करवा के पति का पैर पकड़ लिया. प्राण पर संकट आया देख वह करवा करवा पुकारने लगे. पति की आवाज सुनकर पतिव्रता करवा नदी तट पर पहुंची और आकर मगर को कच्चे धागे से बांध दिया.

मगर को कच्चे धागे में बांधकर वह यमराज के दरबार में पहुंची और यम से कहा कि हे यमराज मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है. आप इस अपराध में मगर को नर्क में भेज दो. यमराज ने इस पर कहा कि अभी मैं उसे नहीं मार सकता क्योंकि अभी उसकी आयु बची हुई है. इस पर करवा ने कहा कि अगर आपने ऐसा नहीं किया तो मैं आपको श्राप दे दूंगी. यमराज पतिव्रता करवा की बात सुनकर घबरा गये और तुरंत नदी तट पर आकर करवा के पति को मगर से आज़ाद कराया एवं दीर्घायु का आशीर्वाद दिया और मगरमच्छ को नर्क भेज दिया.

करवा चथ व्रत पूजन विधि (Karvachauth Vrat Pooja Vidhi)

इस व्रत में पीसी हुई चावल के घोल से दीवाल पर सबसे Šৠपर चन्द्रमा बनते हैं उसके नीचे शिव, गणपति और कार्तिकेय का चित्र बनाया जाता है. फिर पीली मिट्टी से गरी बनायी जाती है जिनकी गोद में गणपति को बैठाया जाता है. गरी को चकी पर बिठाकर सभी सुहाग चिन्हों से उन्हें सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है.

पूजा की समग्रियां व विधान इस प्रकार है: महिलाएं आठ पूरियों की अठावरी बनाती हैं. पूए और हलवा बनाती हैं. पूजा के लिए जल पूरित यानी पानी से भरा हुआ लोटा रखा जाता है. भेंट देने के लिए करवा (मिट्टी का बना एक प्रकार का लोटा) होता है जिसमें गेंहूं भरा होता है और उसके Šৠपर रखे ढ़क्कन में शक्कर का बूरा, दक्षिणा और बिन्दी रखी जाती है. करवे पर सुहागिन स्त्रियां स्वास्तिक चिन्ह बनाती हैं. पूजा के पश्चात हाथ में 13 दाने गेंहूं के लेकर कथा कही और सुनी जाती है. करवा चथ की तो कई कथाएं लेकिन प्रसंगवश यहां एक कथा का उल्लेख किया जा रहा है

कथा के बाद अपनी सासु मां व घ्रर की अन्य बड़ी सुहागन स्त्रियों से आशीर्वाद लिया जाता है व करवा सासु मां को दिया जाता है. संध्या काल में चांद निकलन

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  1. 28 December, 2017 01:33:35 PM Blue Flim xxx Click Hare

    Fantastic Story,.

  2. 17 October, 2016 10:24:12 AM Ishwar Dutt

    इस कथा में जो गरी लिखा है वो गलत है वास्तव में यह शब्द गौरी है।माँ गौरी की गोद में गणेश जी को बिठाए हुए चित्र को लगाएँ ।

  3. 17 October, 2016 07:35:19 AM arun lodhi

    करवा चथ महात्मय (Karvachauth Mahatmya)नारी जब सप्तपदी यानी अग्नि के सात फेरे लेती है तो यही प्रार्थना करती है कि जब तक जीवन रहे मेरा सुहाग बना रहे. अपने सुहाग की रक्षा के लिए नारी यमराज से लड़ने के लिए तैयार रहती है और वह सब कुछ करती है जिससे उनका पति चिरायु हो.भारतीय पराणिक कथाओं में इस प्रकार की अनेक कथाएं हैं जब पत्नी ने अपने पति के जीवन के लिए यमराज को भी ललकारा है और उनसे अपने पति का प्राण वापस प्राप्त कर लम्बे समय तक पति परायण रही हैं. वट सावित्री का व्रत हो या करवा चथ का व्रत दोनों ही व्रत का उद्देश्य पति की लम्बी आयु की कामना है (Vatsavitri Karvachauth vrat)यहां हम कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किये जाने वाले व्रत करक चतुर्थी यानी करवा चथ (Karak Chaturthi Karvachauth) की मान्यता और पूजा के विषय में बात कर रहे हैं. करवा चथ की मान्यता यह है कि इस व्रत को करने से देवी करवा और वीरवती ने जिस तरह अपने पति के प्राणों को बचाकर अपने सुहाग की रक्षा की उसी प्रकार उनका सुहाग भी बना रहेगा.यह सुहागिन स्त्रियों का व्रत है. इस व्रत को वह स्त्रियां भी चाहें तो कर सकती हैं जिनकी मंगनी हो चुकी हो और शादी होने वाली हो. व्रत का नियम यह है कि सुबह स्नान ध्यान करके संकल्प करें कि आप अपने पति की लम्बी आयु, उनके स्वास्थ्य व मंगल हेतु कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (Kartik Krishna Paksha Chaturthi) के दिन निर्जल व्रत रखेंगी और चन्द्रमा के दर्शन के पश्चात ही जल ग्रहण करेंगी.” इस संकल्प के बाद आपको चन्द्रमा के दर्शन से पहले तक निर्जल रहना होता है.करवा चथ कथा कथा (Karvachauth Vrat Katha):प्राचीन काल की बात है करवा नाम की एक स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे गाँव में रहती थी. एक दिन की बात है करवा के पति अन्य दिनों की तरह नदी में स्नान करने गये. स्नान करते समय वहां एक मगर ने करवा के पतिका पैर पकड़ लिया. प्राण पर संकट आया देख वह करवा करवा पुकारने लगे. पति की आवाज सुनकर पतिव्रता करवा नदीतट पर पहुंची और आकर मगर को कच्चे धागे से बांध दिया.मगर को कच्चे धागे में बांधकर वह यमराज के दरबार में पहुंची और यम से कहा कि हे यमराज मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है. आप इस अपराध में मगर को नर्क में भेज दो. यमराज ने इस पर कहा कि अभी मैं उसे नहीं मार सकता क्योंकि अभी उसकी आयु बची हुई है. इस पर करवा ने कहा कि अगर आपने ऐसा नहीं किया तो मैं आपको श्राप देदूंगी. यमराज पतिव्रता करवा की बात सुनकर घबरा गये और तुरंत नदी तट पर आकर करवा के पति को मगर से आज़ाद कराया एवं दीर्घायु का आशीर्वाद दिया और मगरमच्छ को नर्क भेज दिया.करवा चथ व्रत पूजन विधि (Karvachauth Vrat Pooja Vidhi)इस व्रत में पीसी हुई चावल के घोल से दीवाल पर सबसे Šৠपर चन्द्रमा बनते हैं उसके नीचे शिव, गणपति और कार्तिकेय का चित्र बनाया जाता है. फिर पीली मिट्टी से गरी बनायी जाती है जिनकी गोद में गणपति को बैठाया जाता है. गरी को चकी पर बिठाकर सभी सुहाग चिन्हों से उन्हें सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है.पूजा की समग्रियां व विधान इस प्रकार है: महिलाएं आठ पूरियों की अठावरी बनाती हैं. पूए और हलवा बनाती हैं. पूजा के लिए जल पूरित यानी पानी से भरा हुआ लोटा रखा जाता है. भेंट देने के लिए करवा (मिट्टी का बनाएक प्रकार का लोटा) होता है जिसमें गेंहूं भरा होता है और उसके Šৠपर रखे ढ़क्कन में शक्कर का बूरा, दक्षिणा और बिन्दी रखी जाती है. करवे पर सुहागिन स्त्रियां स्वास्तिक चिन्ह बनाती हैं. पूजा के पश्चात हाथ में 13 दाने गेंहूं के लेकर कथा कही और सुनी जाती है. करवा चथ की तो कई कथाएं लेकिन प्रसंगवश यहांएक कथा का उल्लेख किया जा रहा हैकथा के बाद अपनी सासु मां व घ्रर की अन्य बड़ी सुहागन स्त्रियों से आशीर्वाद लिया जाता है व करवा सासु मांको दिया जाता है. संध्या काल में चांद निकलन

  4. 30 September, 2016 09:10:48 AM RITU

    fast wale din sabse phale utta kar kya karte .or sargi mai kya 2chize rakhte ,

  5. 22 August, 2016 06:19:06 PM sadhna sonker

    karwa chauth vrat chut jaane per dubara kaise start kiya jasakta hai

  6. 06 November, 2015 02:01:59 AM gurmaza

    new bollywood movies songs

  7. 30 October, 2015 05:00:39 AM Kusum

    Agar koi apne ghar me akeli ho karwa chauth ka vrat karne ke liye to kaise karna chahiye please suggest me..

  8. 29 October, 2015 06:15:10 AM shilpa Singh

    Krishna g ki pooja kese kre krvachouth me unk liye kese fast rkkhe

  9. 27 October, 2015 10:08:11 AM mamta

    thanks

  10. 06 October, 2015 09:04:03 AM sarita

    Pls mujhe btaye Giri kese bnate h ya market m milti h kya samdhan kare mera

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