Durga Puja Vijaya dashami (दुर्गा पूजा विजया दशमी)

विजया दशमी (VijyaDashami)

भगवती दुर्गा के जिन न रूपों की हम पूजा करते चले आ रहे थे आज का दिन महादेवियों की विदाई का है. इस तिथि को देवी पृथ्वी लोक से अपने धाम को चली जाती हैं यही कारण है कि इस तिथि को यात्रा के नाम से भी जाता है. चुंकि मां दुर्गा अपने समस्त योगिनियों एवं गणों के साथ आश्विन शुक्ल दशमी तिथि को यात्रा करती हैं अत: यह दिन शास्त्रो में यात्रा हेतु अत्यंत शुभ माना गया है. अगर आपको कहीं विशेष उद्देश्य से यात्रा पर निकलना हो तो इस दिन किसी भी पंडित अथवा ज्योतिषी से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यक्ता नहीं होती है. प्राचीन मान्यता के अनुसार दशमी तिथि को प्रात:काल निलकण्ठ नामक पंक्षी का दर्शन अति शुभ फलदायक होता है.

दुर्गा पूजा दसवीं तिथि पूजा विधि (Durga Pooja Dashami Pooja Vidhi)

दशमी तिथि की ये कुछ खास बातें हुई आइये जानें कि इस दिन देवी पूजा का क्या विधान है. हम पहले ही यह बात कर चुके हैं कि यह दिन विदाई का है अत: भक्तगण का मन मां के लिए उदास रहता है फिर भी नियमानुसार विदाई तो करनी ही होती है. भक्तजनों को मां की विदाई करने से पूर्व अन्य दिनों की भांति पंचोपचार सहित कलश और उसमें स्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए. फिर देवी के दोनों ओर स्थित देवी, देवताओं एवं योगिनियों की पूजा करनी चाहिए फिर मां अम्बे की पूजा करनी चाहिए.

दशमी तिथि (Dashami Tithi Durga Pooja) को दुर्गा मां को जयन्ती चढ़ती है अत: पूजा शुरू करने से पूर्व पवित्र हंसिये अथवा चाकू से जयन्ती काट लें. पूजा करते समय सभी देवी, देवताओं को जयन्ती चढ़ायें " जयन्ती अर्पण करने का मंत्र इस प्रकार है "Šৠँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी. दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नमोस्तुते.." पूजा के पश्चात जिस प्रकार प्रथम पूजा के दिन आपने देवी देवताओं का आह्वान किया था उसी क्रम में उन्हें विदा करें. विदा करने के लिए हाथ में जल लेकर जो भी देवी देवता है उनका नाम लेकर यह मंत्र बोलें " Šৠँ भगवान का नाम पूजितोषि क्षमस्व स्वस्थानं गच्छ". ध्यान रखें देवी लक्ष्मी का विसर्जन नहीं करें उनके लिए यह मंत्र बोले "सर्व सभाग्य देहि में, देवी लक्ष्मी रमन्ते गृहे में".

शांति कलश मंत्र (Shanti Kalash Mantra)

जो जयन्ती पूजा के पश्चात बच जाए उसे परिवार एवं कुटुम्ब जनों के सिर पर आशीर्वाद सहित रखें. शांति कलश का जल लेकर अब आप उसमें रखें पंच पल्लवों से परिवार के सभी सदस्यों एवं घर आंगन में जल छिड़कें. इस समय आपको शांति मंत्र का पाठ करना चाहिए यह मंत्र है " स्वस्ति न इन्द्रो वृद्ध-श्रवाहा स्वस्ति नह पूषा विश्व-वेदाहा. स्वस्ति नह-ताक्ष्‌-र्यो अरिष्ट-नेमि स्वस्ति नो बृहस्पतिहि-दधातु॥ द्यहो शन्ति-हि-अन्तरिक्ष शान्तिर्-हि शान्तिहि-आपह शान्ति हि ओषधयह्‌ शान्तिहि. वनस्‌-पतयह-शान्तिहि विश्वे देवाहा शान्तिहि ब्रह्म शान्तिहि शान्ति हि एव शान्तिहि सा मा शान्ति हि- ऐधि॥ यतो यतह समिहसे ततो न अभयम्‌ कुरु. शम्‌ नह कुरु प्रजाभ्योअभयम्‌ नह पशुभ्यहा॥

संध्या काल में देवी प्रतिमा पवित्र और गहरे जल में विसर्जन करें. इस समय मां से प्रार्थना करें कि हमारा आने वाला वर्ष शुभ और मंगलमय रहे हम आपकी पुन: इसी प्रकार पूजा अर्चना कर सकें. इस दिन भगवान श्रीरामचन्द्र जी ने रावण का वध किया था अत: इसे विजया दशमी (Vijyadashami) के नाम से भी जाता हैं. आज भी असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में देश के कई भागों में रावण वध होता है.

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